रोहतक़: हिन्दू मुस्लिम की धार्मिक भावनाओं का प्रतीक,चांदी गांव में रुपे शाह पीर की मजार
हिंदू मुस्लिम की राजनीति कर लोगों की धार्मिक भावनाओं को मोहरा बना इस्तेमाल करने वाले लोगों के लिए रोहतक जिले के चांदी गांव में बाबा रूपेश शाह पीर की मजार बड़ा उदाहरण बनी है,सदियों से इस मज़ार पर हिन्दू पुजारी रहा है,यही नही रुपे शाह पीर की मजार केवल हिन्दू ही मथ्था टेकने के लिए आता है।

||Delhi||Nancy Kaushik||हिंदू मुस्लिम की राजनीति कर लोगों की धार्मिक भावनाओं को मोहरा बना इस्तेमाल करने वाले लोगों के लिए रोहतक जिले के चांदी गांव में बाबा रूपेश शाह पीर की मजार बड़ा उदाहरण बनी है,सदियों से इस मज़ार पर हिन्दू पुजारी रहा है,यही नही रुपे शाह पीर की मजार केवल हिन्दू ही मथ्था टेकने के लिए आता है।श्रद्धालुओ का कहना है कि हर मनोकामना पूरी करने वाले बाबा रुपे शाह पीर हिन्दू ह या मुश्लिम इस बात से उन्हें कोई फर्क नही पड़ता,बल्कि नेताओ ने ये हिन्दू मुश्लिम किया है।
हिंदू और मुस्लिम के नाम पर राजनीतिक रोटियां सेकने वाले लोगों को बाबा रूपेश शाह पीर की मजार करारा जवाब है रोहतक जिले की एकमात्र ऐसी मजार जहां पर सदियों से मुस्लिम के बजाय हिंदू पुजारी रहता है यही नहीं इस मजार को केवल हिंदू समुदाय के लोग ही पूजते है।
दरसल रोहतक जिले के चांदी गांव में बाबा रूपे शाह पीर की मजार सदियों से है। इस मजार के पीछे मान्यता है की लगभग 1000 साल पहले बाबा रुपे शाह पीर युद्ध के दौरान शहीद हो गए थे बताया जा रहा है कि बाबा रूपेश शाह पीर सीर कटने के बाद भी रुपे शाह दुश्मनों से लड़ते रहे और 10 किलोमीटर दूर चांदी गांव में बाबा रुपे शाह पीर का धड़ गिर गया था उसी दिन से बाबा रुपे शाह पीर को लोगों ने पूजना शुरू कर दिया। बाबा रूपे शाह पीर की मजार पर वीरवार के दिन मत्था टेकने के लिए श्रद्धालु भारी संख्या में आते हैं यही नहीं दिवाली से 20 दिन पहले भी बाबा रुपे शाह पीर की मजार पर भंडारा और मेला लगाया जाता है जिसमें भारत के कोने-कोने से श्रद्धालु मत्था टेकते हैं और अपनी मन्नतें मांगते हैं।
वहीं दूसरी ओर बाबा रूपे शाह पीर की मजार पर पुजारी बाबा शमशेर गिरी का कहना है कि बाबा रुपेशाह पीर की मजार हजारों साल पुरानी है और इस मजार पर केवल हिंदू पूजा अर्चना करने के लिए पहुंचते हैं उन्होंने बताया कि अनाज की पहली फसल हो या फिर पशु या फिर कोई गाड़ी खरीदे सबसे पहले बाबा रुपए शाह पीर की मजार पर मत्था टेकने के लिए आता है और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होती है उन्होंने कहा कि हर साल हजारों लाखों श्रद्धालु बाबा रुपे शाह पीर की मजार पर मत्था टेकने के लिए उन्होंने कहा कि सभी श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण होती है वहीं दूसरी ओर सरदारों का कहना है कि उनके माता-पिता दादा-दादी के अलावा उनकी पुश्ते बाबा रुपे शाह पूजते है क्योंकि बाबा रुपेश आपकी हर मनोकामना को पूर्ण करते हैं उन्होंने बताया कि हिंदू मुस्लिम की राजनीति करने वाले केवल नेता है लेकिन भगवान के घर में ना कोई हिंदू है और ना ही कोई मुसलमान है इसलिए बाबा रुपेश पीर की मजार मुस्लिम समुदाय के होने के बावजूद भी हिंदू श्रद्धालुओं की मत्था टेकने के लिए आते हैं।
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