रुसी सेना में भर्ती भारतीय नागरिको को लेकर भारत हुआ सख्त
[pratik kaushik , p24news ] जी 7 के समय जब भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रूस के राष्ट्रयपति से मिले तो उन्होंने एक मांग की। और कहा की भारत के संभंद रूस के साथ काफी अच्छे है। और उनकी मांग ये थी की रूस की सेना में जो भारतीय नागरिक शामिल थे। जो की रूस और यूक्रेन की लड़ाई में मारे गए उनका शव भारत को वापिस लोटा दो। आपको बता दे ये दो नागरिक भारत के पंजाब के रहने वाले थे। और तमाम कोशिशों के बावजूद इसमें मामले में ज्यादा प्रगति नहीं हुई है। आपको बता दे दोनों शवो को वापिस लाने में अभी काफी समय लग सकता है। क्यों की उन्हें संघर्ष क्षेत्र से निकलना होगा जिसमे की समय लग सकता है।

जी 7 के समय जब भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रूस के राष्ट्रयपति से मिले तो उन्होंने एक मांग की। और कहा की भारत के संभंद रूस के साथ काफी अच्छे है। और उनकी मांग ये थी की रूस की सेना में जो भारतीय नागरिक शामिल थे। जो की रूस और यूक्रेन की लड़ाई में मारे गए उनका शव भारत को वापिस लोटा दो। आपको बता दे ये दो नागरिक भारत के पंजाब के रहने वाले थे। और तमाम कोशिशों के बावजूद इसमें मामले में ज्यादा प्रगति नहीं हुई है। आपको बता दे दोनों शवो को वापिस लाने में अभी काफी समय लग सकता है। क्यों की उन्हें संघर्ष क्षेत्र से निकलना होगा जिसमे की समय लग सकता है।
आपको बता दे सूत्रों के अनुसार रूस सेना में शामिल भारतीयों की भर्ती दोनों देशो के बीच एक तनाव का मुद्दा
बन गया है।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस समस्या को देखते एक कड़ा बयान जारी करते हुए रूस से मांग की है की रूस अपनी सेना में भारतीय नागरिको की सभी भर्ती पर रोक लगाए क्युकी ऐसी गतिविधियां दोनों देशो के बिच अच्छी नहीं है। साथ ही भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक और मांग करी की सभी भारतीय लोग जो फसे हुए है उनको वापिस भारत को तत्काल में लोटा दिया जाये। उन्हें जोखिम में ना डाला जाए। भारत इन सब समस्याओ के लिए रूस पर दबाव बना रहा है।
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