गुरुग्राम-कन्हैई गाँव में घर बचाओ गांव बचाओ को लेकर अनिश्चितकालीन धरना
गुरुग्राम के कन्हई गांव में घर बचाओ गांव बचाओ को लेकर ग्रामीण अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं। उनकी मांग है कि उनके गांव में हो रही हुड्डा विभाग दुवारा तोड़फोड़ और उनकी अधिग्रहित की गई जमीनों का या तो उचित मुवावजा दिया जाये नहीं तो उनकी ज़मीन को मुक्त किया जाए ग्रामीण इसी बात को लेकर स्थानीय विधायक और स्थानीय लोकसभा सांसद से भी मिल चुके हैं मगर आश्वासन के अलावा उनको कुछ भी हाथ नहीं लगा।

||Delhi||Nancy Kaushik||गुरुग्राम के कन्हई गांव में घर बचाओ गांव बचाओ को लेकर ग्रामीण अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं। उनकी मांग है कि उनके गांव में हो रही हुड्डा विभाग दुवारा तोड़फोड़ और उनकी अधिग्रहित की गई जमीनों का या तो उचित मुवावजा दिया जाये नहीं तो उनकी ज़मीन को मुक्त किया जाए ग्रामीण इसी बात को लेकर स्थानीय विधायक और स्थानीय लोकसभा सांसद से भी मिल चुके हैं मगर आश्वासन के अलावा उनको कुछ भी हाथ नहीं लगा।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार और हुड्डा विभाग मिलकर उनके साथ अत्याचार कर रहे हैं 30 साल पुराने बसे घरों को तोड़ा जा रहा है आखिर क्यों , सरकार जबरदस्ती उनकी ज़मीन पर कब्जा करना चाहती है सरकार एक तरफ कहती है कि यह सरकारी जमीन है लेकिन यह सरकारी जमीन नहीं है यह दादा लायक पुराने जमाने की बसाई हुई बसापत है जिसे आज सरकार और हुड्डा मिलकर हड़पना चाहते हैं आज लगातार सातवें दिन कन्हैई संघर्ष समिति की ओर से चल रहा धरना प्रदर्शन अपने आशियाने को बचाने का ग्रामवासियों का प्रयास लगातार जारी है सभी को एक ही आस है कि सभी का संघर्ष एक ना एक दिन रंग लाएगा सरकार व विभाग को हमारे विषय पर संज्ञान लेना पड़ेगा और हमें राहत देकर इस समस्या का समाधान करना पडेगा ग्रामीणों का यह भी कहना है कि हुड्डा विभाग और सरकार जहां पर लोग बसे हुए हैं उनकी जमीनों का या तो उचित मुआवजा दे दे या फिर उनको उनकी जगह उनके प्लाट देदे ताकि दोनों तरफ से राहत मिल जाए।
कन्हैई संघर्ष समिति की ओर से चल रहे प्रदर्शन घर बचाओ गांव बचाओ आज छठे दिन लगातार लोग धरने पर बैठे रहे और सभी का सरकार से और प्रशासन से निवेदन है कि हमारे विषय को संज्ञान में लाया जाए जब हमारे बुजुर्गों ने वर्ष 1992 में अधिग्रहण की धारा 5a के अंतर्गत अपने मकानों को बचाने के लिए आपत्ति दर्ज की तो फिर आज 30 साल बाद हमें घरों से बेघर करके और हमारी जमीनों को मनमाने भाव में नीलाम करके हम पर अत्याचार क्यों किया जा रहा है हमारे बुजुर्गों ने 30 वर्ष पहले जब मुआवजा नहीं लिया तो इससे यह तो तय होता है कि रिहायशी मकानों का मुआवजा ना लेना और खेती बाड़ी की जमीन का मुआवजा ले लेना क्या यह अंतर अधिकारियों प्रशासन को या सरकार को बिल्कुल समझ नहीं आ रहा हम पर यह अत्याचार ना हो इसलिए हम इस धरने को निरंतर जारी रखेंगे जब तक हमारी सुनवाई नहीं होगी ऐसा सभी ग्राम वासियों ने एकजुट एकमत होकर संकल्प किया।
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