रादौर से करीब 80 किलोमीटर दूर हिमाचल के क़स्बा त्रिलोकपुर स्थित महामाई बाला सुंदरी मंदिर हिमाचल ही नहीं बल्कि उत्तर भारत के लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है।
रादौर से करीब 80 किलोमीटर दूर हिमाचल के क़स्बा त्रिलोकपुर स्थित महामाई बाला सुंदरी मंदिर हिमाचल ही नहीं बल्कि उत्तर भारत के लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। मंदिर में चैत्र और अश्वनी मास में विशाल मेले का आयोजन होता है। जिसमे लाखों श्रद्धालु माथा टेकते है।

मंदिर के पुजारी राजेश कुमार ने हमारी टीम से बातचीत करते हुए बताया कि महामाई बाला सुन्दरी यूपी के देवबन्द नामक स्थान से नमक की बोरी में त्रिलोकपुर आई थीं। उन्होंने बताया कि लाला रामदास जो सदियों पहले त्रिलोकपुर में नमक का व्यापार करते थे, उनके नमक की बोरी में माता उनके साथ यहां आई थीं। लाला की दुकान त्रिलोकपुर में पीपल के वृक्ष के नीचे हुआ करती थी। उसने देवबन्द से लाया तमाम नमक दुकान में डाल दिया और बेचते गए मगर नमक समाप्त होने में नहीं आया। लाल रामदास चिन्ता में पड़ गए कि नमक समाप्त क्यों नहीं हो रहा। तब माता बाला सुन्दरी ने रात्रि को लाला जी के सपने में आकर दर्शन दिए और कहा कि मैं यहां पीपल के वृक्ष के नीचे पिंडी रूप में स्थापित हो गई हूं और तुम यहां पर मेरा भवन बनाओ। लाला जी ने फिर माता की आराधना की और आह्वान किया कि इतने बड़े भवन निर्माण के लिए मेरे पास धन का अभाव है। आप सिरमौर के महाराजा को भवन निर्माण का आदेश दें। माता ने अपने भक्त की पुकार सुन ली और उस समय के सिरमौर के राजा प्रदीप प्रकाश को सोते समय स्वप्न में दर्शन देकर भवन निर्माण का आदेश दिया। महाराजा ने तुरन्त जयपुर से कारीगरों को बुलाकर भवन निर्माण का कार्य आरंभ करवाया जो सन् 1630 में पूरा हुआ।
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