||Delhi||Nancy Kaushik||हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने अपने समकक्ष हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह को वैकल्पिक मार्ग से हिमाचल होते हुए सतलुज का पानी हरियाणा में पहुंचाने की पेशकश की है। ये प्रस्ताव उन्होंने सुखविंद्र सिंह सुक्खू के समक्ष 22 अप्रैल को चंडीगढ़ स्थित हरियाणा निवास में दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बीच हुई बैठक में रखा है। इस पर हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ने सैद्धांतिक सहमति भी दे दी है। इस विषय में एसवाईएल हिमाचल मार्ग समिति ने यह मांग कई वर्षों से उठाई है। इसस सैद्धांतिक सहमति के लिए समिति मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करती है और चंडीगढ़ में सीएम मनोहर लाल से मुलाकात कर उन्हें बधाई देगी। यह बात एसवाईएल हिमाचल मार्ग समिति के अध्यक्ष एडवोकेट जितेन्द्र नाथ ने निजी रेस्तरां में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कही। उन्होंने कहा कि अगर इस प्रोजेक्ट पर शीघ्र ही कार्य आरंभ हो जाए तो यह कार्य लगभग एक साल 6 माह में पूर्ण हो जाएगा और राज्य सरकारों को इसका खर्च भी वहन नहीं करना होगा। क्योंकि एसवाईएल निर्माण का खर्च वल्र्ड बैंक द्वारा किया जाएगा।
एसवाईएल हिमाचल मार्ग समिति भी हरियाणा सरकार को हिमाचल के रास्ते पानी लाने का सुझाव दे चुकी है। इस समिति में भूतपूर्व इंजीनियर जुड़े हैं और पिछले दस साल से इसके लिए काम कर रहे हैं। समिति के अध्यक्ष एडवोकेट जितेन्द्र नाथ ने समिति ने पंजाब के बजाय हिमाचल के रास्ते से पानी लाने का रास्ता सुझाया है। हरियाणा में 72 ब्लाक डार्क जोन में जा चुके हैं और हालात यही रही तो 2039 तक प्रदेश का जलस्तर और नीचे चला जाएगा, जिससे दिक्कतें बढऩी तय हैं।
पंजाब के रास्ते से हरियाणा में पानी लाने पर 157 किलोमीटर की दूरी है और पंजाब सरकार ने इसके लिए अधिग्रहित जमीन भी किसानों को वापस कर दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि पंजाब के बजाय 67 किलोमीटर हिमाचल के रास्ते से सतलुज दरिया का पानी लाया जा सकता है। इस पर लगभग 4200 करोड़ रुपये खर्च आएगा। सतलुज से नालागढ़, बद्दी, पिंजौर, टांगरी के रास्ते जनसुई हैड में पानी लाकर पूरे हरियाणा को पानी वितरित किया जा सकता है।