भिवानी, डीसी नरेश नरवाल द्वारा जिला के सभी प्राइवेट/सरकारी स्कूल और शिक्षण संस्थाओं के संचालकों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने स्कूल के वाहनों में सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी को लागू करें। सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी के नियमों की अवहेलना करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाने को लेकर अधिकारियों को दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। जिसके चलते जिला शिक्षा अधिकारी नरेश महता,जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी संतोष नागर ,खंड शिक्षा अधिकारी शिवकुमार तंवर ने अपनी टीम के साथ आज सभी प्राइवेट स्कूलों के संचालकों के साथ बैठक की है , इस बैठक में संचालकों को नियमों के पालन करने के लिए सख्त आदेश जारी किए गए हैं,कहा कि बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए किसी प्रकार की कोताही नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर स्कूली वाहनों के लिए सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी सरकार द्वारा बनाई गई है। इसके तहत बच्चों की सुरक्षा को लेकर स्कूली वाहनों में जरूरी उपकरण और अन्य व्यवस्थाएं होना जरूरी है। उन्होंने बताया कि स्कूलों की बस का रंग पीला होना चाहिए और उसमें नीले रंग की पट्टी में स्कूल का नाम लिखा होता है। बस के अंदर प्राथमिक उपचार बॉक्स और अग्निशमन यंत्र होना जरूरी है। इसके अलावा बस के अंदर किसी भी प्रकार की गतिविधि की निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरा होना चाहिए। स्कूली वाहन की स्पीड पर कंट्रोल के लिए स्पीड गवर्नर लगा होना चाहिए।
उन्होंने बताया स्कूल की बस के ड्राइवर का मेडिकल फिटनेस होना जरूरी है और ड्राइवर रखे जाने वाले के लिए 5 साल का अनुभवहोना चाहिए। स्कूल की बस के विंडो पर होरिजेंटल ग्रिल हो ताकि कोई बच्चा किसी कारण बस खिड़की से बाहर नहीं गिर सके। स्कूल की बस पर ड्राइवर का नाम उसका मोबाइल नंबर अंकित होना चाहिए । इसके साथ ही ड्राइवर प्रॉपर वर्दी में हो, स्कूल बस चलाते समय सीट बेल्ट अवश्य लगनी होती है। स्कूली बस की पासिंग और टैक्स भरा हुआ होना चाहिए। इसके साथ ही स्कूल बस में महिला के परिचालक का होना भी जरूरी है। उन्होंने जिला के स्कूल जिला के सभी प्राइवेट सरकारी और सभी शिक्षण संस्थानों के संचालकों को निर्देश दिए हैं कि वे स्कूली वाहनों में सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी की पालना करें, आदेशों की अवहेलना करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। किसी भी स्कूल संचालक को नियमों की अवहेलना करने की छूट नहीं है।
विभाग द्वारा एक जांच कमेटी का गठन किया गया है, जिसमें शिक्षा विभाग का एक अधिकारी और सचिव प्रदेश की परिवहन विभाग का एक कर्मचारी भी शामिल है। इस कमेटी द्वारा स्कूली वाहनों की जांच की जा रही है। एक सप्ताह के अंदर अंदर सभी स्कूलों के वाहनों की रिपोर्ट मांगी गई है। जांच कमेटी दस्तावेजों की जांच कर एक सप्ताह में रिपॉट प्रस्तुत करेगी। कमेटी प्राईवेट/ सरकारी स्कूल व शिक्षण संस्थाओं के वाहनों व चालक व परिचालकों के जरूरी कागजातों की जांच कर रही है। जांच कमेटी में शिक्षा विभाग का भी एक प्रतिनिधि बीईओ या उसके समकक्ष शामिल होगा। यह कमेटी एक सप्ताह के अंदर-अंदर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।
जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा कि सरकार व विभाग के नियम पर काम किया जाए। कहा कि अथोर्टी को आंख दिखाना नही चलेगा।बच्चा किसी का भी हो हमारा बच्चा है,चैनल के अनुसार शिक्षा दी जाती है,लापरवाही से नही । बोर्ड की कक्षाओं के लिए कई बार विभाग भी सरकारी स्कूलों में छुट्टी के दिन कक्षा लगाने की अनुमति देता है उसमे रीजन होता है यदि कोई रीजन होता है उसके प्रति विभाग को संज्ञान में देना जरूरी है। बस की पूरी डिटेल चाहिए, डिटेल सेल्फ डकरोरेशन फार्म में शेयर करनी होगी।कोई बस छुपानी नही है ,चाहे आधी हो या पूरी। बस कोई कमी है तो उसे पूरी करके ही सड़क पर दौड़ाए। वही इन्फ्रास्टेकचर अपडेट होना चाहिए,मान्यता अनुसार ही स्कूल चलाना है ,कितनी कक्षा की मान्यता है उतनी ही कक्षा विद्यालय में नियम अनुसार लगानी चाहिए दाखिला को लेकर सतर्कता बरती जाएगी, जो विद्यालय दूसरों के स्कूलों में अपने बच्चो को अटैच करता है यह नियम का उलंघन हैं।। यूडाइस पोर्टल पर बच्चे का ब्योरा सही हो । ड्रॉप आउट विद्यार्थियों पर फ़ोकस रहे,ड्रॉप आउट की संख्या बढ़ती है तो इसे खोजने में विभाग को बड़ा समय मिलता है। इस लिए विद्यालय अभिभावकों व बच्चों को गुमराह न करें।100 प्रतिशत बच्चों का डाटा सही रखें और डाटा अपडेट में विभाग को सहयोग दें।
जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी सतोष नागर ने कहा कि विद्यालयों में जो भी कमिया है उन्हे सुधार लें,नॉर्म्स को फॉलो करें,कनीना की घटना से सबक लें।अपने अंदर झांक कर देखे और सुधार करें। हमे अच्छे कार्य करने चाहिए ,आदेश का इंतजार नहीं करना चाहिए, आप 10 दिन के समय अनुसार अपनी कमियों को सही करें।नियमों का पालन जरूर करें। उन्होंने कहा कि बिना वजय किसी को परेशान नहीं किया जाएगा,कोई भी सूचना मांगी जाए,तो उन्हे प्राथमिक आधार पर देना चाहिए। विद्यालय अपने तथ्यों को छिपाए नही।कानून के अनुसार कार्य किया जाए। वही जिला शिक्षा अधिकारी ने संचालकों से स्काउट एंड गाइड से जुड़ने के लिए अपील की ।
वहीं प्राइवेट स्कूल वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान राम अवतार शर्मा ने कहा कि विद्यालयों के अंदर भेजी गई जांच टीम विद्यालयो में संचालकों व प्राचार्य पर किसी प्रकार का दबाव नए बनाएं, उन्होंने कहा कि प्राइवेट स्कूल पूरी तरह से सरकार व विभाग को सहयोग देने के लिए तैयार है,लेकिन विद्यालय पर जबरदस्ती तानाशाही व थानेदारी बर्दाश्त नहीं होगी।