किसान खेती छोड़ मधुमक्खी पालन कर कमा रहे मोटा मुनाफा
किसान बुधराम परम्परागत खेती को छोडक़र पिछले 39 साल से मधुमक्खी पालन कर रहा है मधुमक्खी पालन से लाखों रुपए कमाने वाले किसान बुधराम दूसरे किसानों को भी मधुमक्खी पालन के लिए प्रेरित कर अभी तक 25 से 30 किसानों को मधुमक्खी पालन करने का प्रशिक्षण दे चुके है।

पलवल || किसान परंपरागत खेती को छोडक़र बागवानी की तरफ बढ़ रहे है। गांव किशोरपुर के रहने वाले किसान बुधराम ने सन 1984 में परम्परागत खेती को छोड़कर मधुमक्खी पालन करने का निर्णय लिया। बागवानी विभाग द्वारा किए गए सहयोग की बदौलत बुधराम ने सब्सिडी पर 50 मधुमक्खी पालन के बॉक्स खरीदे और मधुमक्खी पालन शुरू कर दिया। बागवानी विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र मंडकौला ने बुधराम को मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण दिया जिसकी बदौलत मधुमक्खी पालन बुधराम की आय का स्रोत बन गया। बुधराम मधुमक्खी के शहद, मधुमक्खी के छत्ते से निकलने वाली राई जैली, मोम और मधुमक्खी के डंक को बाजार में बेचकर लाखों रूपए कमा रहे है।

किसान दुल्हेराम ने बताया कि मधुमक्खी पालन के लिए सरकार भी किसानों की मदद कर रही है। सरकार द्वारा मधुमक्खी पालन के लिए सब्सिडी प्रदान की जा रही है। वहीं शहद को बेचने के लिए एक मंच प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों को परम्परागत खेती को छोड़कर मधुमक्खी पालन करना चाहिए ताकि उनकी आमदनी बढ़ सके। बागवानी विभाग पलवल के अधिकारी नितेश कुमार ने बताया कि बागवानी विभाग द्वारा जागरूकता शिविर लगाकर किसानों को अवेयर किया जा रहा है। किसानों को मधुमक्खी पालन के लिए प्रदान किए जाने वाले बॉक्स पर 85 प्रतिशत अनुदान दिया गया है। वहीं मधुमक्खी पालन में प्रयोग किए जाने वाले औजारों पर भी किसानों को 75 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है।
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