आशा वर्करों ने अपनी मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन किया

यूनियन के अनुसार आशा वर्करों को प्रति माह केवल चार हजार रुपए और कुछ अन्य इंसेंटिव दिए जाते हैं जो औसतन प्रति वकर्र प्रतिमाह साढ़े सात हजार रुपए के आसपास बनते हैं, लेकिन इसमें से सरकारी काम करने के लिए आशा वर्करों के लगभग ढाई हजार रुपए किराए में खर्च हो जाते हैं। यूनियन के अनुसार आशा वर्करों पर सरकार अतिरिक्त काम भी थोप रही है।  वर्ष 2018 के बाद आशाओं के काम लगातार बढ़े गये।

पलवल || आशा वर्करों ने अपनी मांगों को लेकर आज नागरिक अस्पताल परिसर में धरना प्रदर्शन किया। वेतन वृद्धि समेत अन्य मांगों को लेकर आशा वर्कर हड़ताल कर रही है। आशा वर्करों की मांग है कि सरकार उनकी मांगों को प्राथमिकता के तौर पर हल करें।गौरतलब है कि हरियाणा प्रदेश में करीब 20 हजार आशा वर्कर हडताल पर है, जिनमें से करीब एक हजार से अधिक आशा वर्कर पलवल में हड़ताल पर है। यूनियन के अनुसार आशा वर्करों को प्रति माह केवल चार हजार रुपए और कुछ अन्य इंसेंटिव दिए जाते हैं जो औसतन प्रति वकर्र प्रतिमाह साढ़े सात हजार रुपए के आसपास बनते हैं, लेकिन इसमें से सरकारी काम करने के लिए आशा वर्करों के लगभग ढाई हजार रुपए किराए में खर्च हो जाते हैं। यूनियन के अनुसार आशा वर्करों पर सरकार अतिरिक्त काम भी थोप रही है।  वर्ष 2018 के बाद आशाओं के काम लगातार बढ़े गये। साथ ही महंगाई भी कई गुणा बढ़ गई है लेकिन मानदेय में कोई वृद्धि नहीं की गई। वर्ष 2009 से लगी हुई आशा वर्करों को अभी तक पक्का नहीं किया गया है। इसके अतिरिक्त आशा वर्करों से ऑनलाइन काम करवाया जाता है कि जबकि आशा वर्करों को ऑनलाइन के बारे में प्रशिक्षण नहीं दिया गया है।  इसके के चलते आशा वकर्रों को आंदोलन करने पर मजबूर होना पड़ा है। ऐसे में सरकार से मांग है कि वह उनकी मांगों को पूरा करे।