ग्रामीण डालचंद ने बताया की संग्राम गिरि मराज जो की उत्तर प्रदेश के शामली जिले के रहने वाले है और एक साल पहले मंदिर में आये थे। जिन्होंने 23 अप्रैल से मंदिर में साथ धुनें जलाकर उनके बीच में बैठकर अग्नि तपस्या कर रहे है। यह तपस्या 41 दिन तक करेंगे। संग्राम गिरि मराज जी सुबह 11 से 2 बजे तक तपस्या में विधिविधान के अनुसार तपस्या में बैठते है । 1 जून को बाबा की तपस्या पूरी हो जाएगी और उसके बाद 2 जून को मंदिर में भण्डारे का आयोजन किया जायेगा। ग्रामीणों ने बताया की मंदिर की ऐसी मान्यता है की मंदिर में निरवाणी बाबा अपने चेले के साथ उन्हें समाधी ले ली थी। उसके बाद गांव में ग्रामीणों की तरफ से गांव में मंदिर बनाया गया बाबा की समाधी भी बनाई गई है। समाधी के अंदर महिला नहीं जा सकती। मंदिर से लोगो की आस्था जुडी हुई है जो भी व्यक्ति समाधी में माथा टेकते है उनकी जो मन्नत है वो सभी पूरी हो जाती है।
बाबा संग्राम गिरि मराज जी का कहना है की जब 21 वर्ष का था तो मैंने सन्यास ले लिया था तभी में भगवान् की भगति में लीन हो गया मैंने 41 दिन की अग्नि तपस्या साथ धुनों के भी शुरू की गांव सुख शान्ति के लिए यह तपस्या शुरू की मन्दिर एक आस्था केंद्र बना हुआ जो भी व्यक्ति यहाँ आते है उनकी सभी मन्नते पूरी होती है