यमुनानगर : कांग्रेस अध्यक्ष कुमारी सैलजा ने यमुनानगर जिला सचिवालय के सामने धरना प्रदर्शन कर निकाली भड़ास  ....

सैलजा की मने तो बीजेपी हिंदुत्व का नारा देती हैं मगर देश को यह नहीं बताती कि यह लोग कैसा हिंदुत्व चाहते हैं? जाती मजहब के नाम पर? या विचार धारा के आधार पर? या फिर बीजेपी देश को अपना गुप्त एजंडा बताएं। सैलजा ने आरोप लगाया की बीजेपी के नेताओं द्वारा जाति मजहब के नाम पर नफरत का जहर घोलने, और देश को बांटने के अलावा हिंदुत्व के लिए कुछ नही किया गया। हकीकत में बीजेपी सरकार में देश तरक्की करने के बजाए पहले से भी पिछड़ चुका है।

यमुनानगर : कांग्रेस अध्यक्ष कुमारी सैलजा ने यमुनानगर जिला सचिवालय के सामने धरना प्रदर्शन कर निकाली भड़ास  ....

 यमुनानगर : माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा आरक्षण के आधार पर नौकरियों में नियुक्ति और पदोन्नति को सही नही ठहराने का ठीकरा कांग्रेस पार्टी भारतीय जनता पार्टी के सिर पर फोड़ रही है। रविवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं हरियाणा कांग्रेस अध्यक्ष कुमारी सैलजा ने इसकी भड़ास यमुनानगर जिला सचिवालय के सामने धरना प्रदर्शन कर निकाली। सैलजा ने कहा कि कोर्ट के फैसले में बीजेपी द्वारा रखी गई दलीलें जस की तस लिखी हुई है। जो यह साफ करता हैं की बीजेपी इस आरक्षण के खिलाफ हैं। इस संबंध में यमुनानगर जिला प्रशासन के माध्यम से सैलजा ने देश के महामहिम राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन भी भेजा। इसके उपरांत हरियाणा कांग्रेस अध्यक्ष ने मीडिया से चर्चा करते हुए भारतीय जनता पार्टी पर  शब्दों के तीखे बाण छोड़ें। सैलजा की माने तो बीजेपी और आरएसएस का एजेंडा दलित, आदिवासी और पिछड़ावर्ग विरोधी है। और इस पार्टी के बड़े नेता लोगों की सोच में नफरत का जहर घोलकर देश को जाति और मजहब के नाम पर बांटने का काम कर रहे हैं। रविवार को कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्र मंत्री कुमारी सैलजा यमुनानगर पहुँची। दरअसल सैलजा माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा नौकरियों में नियुक्ति और पदोन्नति लेने के लिए आरक्षण समाप्त करने के फैसले से छटपटाई हुई हैं। वह इसका दोष बीजेपी सरकार को दे रही है। कोर्ट के फैसले पर तो सैलजा एतराज नहीं कर सकती लिहाजा वह आदिवासी, दबे कुचले और पिछड़ा वर्ग के कंधों पर बंदूक रखकर भारतीय जनता पार्टी की सरकार पर निशाना साध रही है। इस मौके पर जिला सचिवालय के बाहर एक धरना प्रदर्शन भी किया गया। जिसके बाद जिला प्रशासन के माध्यम से  देश के महामहिम राष्ट्रपति  के नाम एक  ज्ञापन भी भेजा जाना था।कुमारी सैलजा का संबोधन जैसे ही समाप्त हुआ तहसीलदार खुद उनके पास ज्ञापन लेने पहुंच गए। मगर ज्ञापन नदारद था, सैलजा अपने कार्यकर्ताओं से पूछती रही की मांग पत्र कहाँ हैं? और तहसीलदार साहब को भी सफाई देती रही कि शायद ज्ञापन लेकर कुछ लोग पहले आगे चले गए हैं।कुछ समय बाद  एक शख्स ज्ञापन लेकर पहुंचा जिसे कुमारी शैलजा ने तहसीलदार को सौंप दिया। सैलजा ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार दलित और पिछड़ा वर्ग को नौकरियों में आरक्षण के आधार पर नियुक्ति और प्रमोशन से दूर रखना चाहती है। तभी सरकार द्वारा लिखित में दी गई दलीलों को जस का तस माननीय सुप्रीम कोर्ट ने अपने जजमेंट में लिखा है। जिस आरक्षण के बल पर दबे कुचले वर्ग के लाखों लोग आज आगे बढ़े हैं। उस आरक्षण को एक कलम से रद्द कर दिया गया। जिसका मुख्य कारण बीजेपी सरकार द्वारा दी गई दलील है। सैलजा की माने तो बीजेपी और आरएसएस का यह एजेंडा है कि वह दिखावे के लिए दलितों के साथ होने का दावा करते हैं, और दिल से दलित आदिवासी और पिछड़ा वर्ग विरोधी मानसिकता रखते हैं।