मथुरा में हाथियों के संरक्षण के लिए काम करने वाली संस्था वाइल्ड लाइफ एसओएस पिछले 10 वर्षों से कृष्ण की नगरी मथुरा में काम कर रही है ये उन हाथियों का सहारा  

यहां मृत हाथियों के नाम के साथ उनके बारे में लिखा हुआ बोर्ड भी लगाया गया है जिससे उन हाथियों के बारे में लोग जान सकें बता दें कि वाइल्ड लाइफ एसओएस विलुप्त होती वन्यजीव प्रजातियों के संरक्षण के लिए काम करने वाली संस्था है इसने मथुरा के फहर ब्लॉक के चुरमुरा गांव में हाथी संरक्षण सेंटर की स्थापना अब से 10 साल पहले की थी जहां देश भर से रेस्क्यू कर लाए गए हाथियों को रखा जाता है। संस्था हाथियों के लिए एक अस्पताल की भी स्थापना कर रही है।जहाँ पर उनको पूर्ण देखभाल के साथ उत्तम उपचार भी मिल सकेगा

मथुरा में हाथियों के संरक्षण के लिए काम करने वाली संस्था वाइल्ड लाइफ एसओएस पिछले 10 वर्षों से कृष्ण की नगरी मथुरा में काम कर रही है ये उन हाथियों का सहारा  
मथुरा में हाथियों के संरक्षण के लिए काम करने वाली संस्था वाइल्ड लाइफ एसओएस पिछले 10 वर्षों से कृष्ण की नगरी मथुरा में काम कर रही है ये उन हाथियों का सहारा है जो कही ना कही किसी घटना दुर्घटना बीमारी प्रताड़ना का शिकार हुए होते है हाल ही में इस संस्था के द्वारा उन मृत हाथियों की स्मृति में एक स्मारक का निर्माण किया गया है। जो इस संस्था के देख रेख में मथुरा के फरह में बने हाथी रेस्क्यू सेंटर में रेस्क्यू कर लाये गए थे जिनकी भरपूर देखभाल भी की गई बचाने की तमाम कोशिशें भी की गई उनको याद रखा जा सके ने जानकारी के मुताबिक यह स्मारक उन हाथियों की याद में बनाया गया है जिन्हें रेस्क्यू ऑपरेशन्स के वक्त बचाने की कोशिश की गई
 लेकिन इलाज के वक्त उनकी मौत हो गई।वाइल्ड लाइफ एसओएस हाथी संरक्षण केंद्र के मैनेजर नरेश कुमार ने बताया है कि हाथियों के लिए बनने वाला यह स्मारक देश का इस तरह का पहला स्मारक है उन्होंने बताया है कि फिलहाल उनके पास देश के विभिन्न हिस्सों से बचाए गए 23 हाथी मौजूद हैं जिनका इलाज किया जा रहा है मेमोरियल के बारे में बताते हुए नरेश कुमार ने कहा हैं कि इसे उन हाथियों की याद में बनाया गया है, जिनको रेस्क्यू किया गया था और जिन्होंने इलाज के वक्त दम तोड़ दिया है।यहां मृत हाथियों के नाम के साथ उनके बारे में लिखा हुआ बोर्ड भी लगाया गया है जिससे उन हाथियों के बारे में लोग जान सकें बता दें कि वाइल्ड लाइफ एसओएस विलुप्त होती वन्यजीव प्रजातियों के संरक्षण के लिए काम करने वाली संस्था है इसने मथुरा के फहर ब्लॉक के चुरमुरा गांव में हाथी संरक्षण सेंटर की स्थापना अब से 10 साल पहले की थी जहां देश भर से रेस्क्यू कर लाए गए हाथियों को रखा जाता है। 
संस्था हाथियों के लिए एक अस्पताल की भी स्थापना कर रही है। जहाँ पर उनको पूर्ण देखभाल के साथ उत्तम उपचार भी मिल सकेगा हाथी संरक्षण और देखभाल केंद्र "वन्यजीव  संस्था SOS wildlife की एक अहम परियोजना है जो उत्तर प्रदेश वन विभाग उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार के सहयोग से संकट में बंदी हाथियों की पुनर्वास के लिए कार्य करती यह संस्था किसी भी प्रकार के जंगली जानवरों के रेस्क्यू का एक बड़ी अनुभवी टीम के साथ कार्य करती है जो बहुत जोखिम भरा भी होता है संस्था ओर उसकी टीम हर जोखिम से गुजरने को हमेशा ततपर रहती है ए एक्सपर्ट का पैनल भी इनमें शामिल होता है
वाइल्डलाइफ एसओएस का सबसे पहला और पुराना हाथी सीता थी जिसकी उम्र 58 वर्ष थी हाथी चंपा जिसकी उम्र 55 साल थी उसकी की याद में लिखा गया है आपने हमें हाथियों की मदद के लिए आगे का रास्ता दिखाया सभी के लिए आप एक प्रेरणा हो यहां पर सभी मृत हाथियों की याद में उनकी हर अच्छाई को याद रखा जाता है और उनके नाम पर स्मृति लगाई गई है.इस संस्था के द्वारा रेस्क्यू कर लाये गए और यहां रखे गए सभी हाथियों के विषय मे चुनौतियों से लबरेज चौंकाने वाली कहानियां हैं गहरी बीमारियों और प्रताड़नाओं से इनको बचाया गया था यहां कई हाथी ऐसे भी है जो कठिन परिश्रम के दौर से गुजरे है जिनसे श्रम भी कराया जाता था उस मुक्ति के बाद से अब ये हाथी अक्सर शांति और सुरक्षा में रहते हैं अब भारी बोझ उठाने या गर्म फुटपाथ पर चलने के लिए मजबूर नहीं किया जाता है,