अम्बाला शहर में सबसे प्राचीन शिव मंदिर हाथीखाना में पूरे उल्लास और श्रद्धा से मनाई गई शिवरात्रि

देश-प्रदेश के अन्य हिस्सों की तरह अम्बाला के सबसे प्राचीन शिव मंदिर हाथीखाना में भी शिवरात्रि पूरे उल्लास और श्रद्धा से मनाई जाती ! देश के गुलामी के समय शेरशाह सूरी मार्ग के पास घने जंगल में यह मंदिर बना था ! ब्रिटिश शासक में शासक यहाँ अपने हाथी यहाँ बांधा करते थे तभी इसका नाम मंदिर हाथीखाना पड़ा था !अंबाला के प्राचीन हाथीखाना मंदिर में श्रदालुओं की सुबह 4 बजे से ही भगवान् शिव के दर्शन करने के लिए लंबी लाईनें लग जाती हैं ! आज सुबह चार बजे से ही अम्बाला के मंदिर घंटियों से गूंज उठे, मौका था चैत्र शिवरात्रि का! मंदिर के बाहर भगतों की लम्बी लाइने लगी देखी जा सकती हैं ! पुलिस भी लोगों की सुरक्षा में तैनात की जाती है !

अम्बाला शहर में सबसे प्राचीन शिव मंदिर हाथीखाना में पूरे उल्लास और श्रद्धा से मनाई गई शिवरात्रि

अम्बाला (अंकुर कपूर ) || देश-प्रदेश के अन्य हिस्सों की तरह अम्बाला के सबसे प्राचीन शिव मंदिर हाथीखाना में भी शिवरात्रि पूरे उल्लास और श्रद्धा से मनाई जाती ! देश के गुलामी के समय शेरशाह सूरी मार्ग के पास घने जंगल में यह मंदिर बना थाब्रिटिश शासक में शासक यहाँ अपने हाथी यहाँ बांधा करते थे तभी इसका नाम मंदिर हाथीखाना पड़ा था !अंबाला के प्राचीन हाथीखाना मंदिर में श्रदालुओं की सुबह 4 बजे से ही भगवान् शिव के दर्शन करने के लिए लंबी लाईनें लग जाती हैं ! आज सुबह चार बजे से ही अम्बाला के मंदिर घंटियों से गूंज उठे, मौका था चैत्र शिवरात्रि का! मंदिर के बाहर भगतों की लम्बी लाइने लगी देखी जा सकती हैं !  पुलिस भी लोगों की सुरक्षा में तैनात की जाती है !

अम्बाला छावनी में वर्ष 1844 में बने प्राचीन मंदिर हाथीखाना में लगी श्रधालुओं की लंबी लाईनें इस बात की गवाह हैं कि लोगों में भगवान शिवजी के प्रति कितनी आस्था है ! चैत्र शिवरात्रि के मौके पर सुबह 4 बजे से ही मंदिरों में भगतों की लंबी लाईने लगनी शुरु हो गई थी ! हर किसी को बस इंतजार था तो सिर्फ़ शिवलिंग को जलाभिषेक करवाने का ! शायद हर कोई इस दिन मात्था टेक कर भोले शंकर से देश और प्रदेश में शांति की कामना कर रहा था ! श्रदालुओं का कहना था कि खास तौर पर आज के दिन भोले शंकर के दर्शन कर हर मनोकामना पूरी होती है ! आज के दिन ही भोले शंकर के भक्त मंदिरों में पहुंचते है और भोले शंकर का जलाभिषेक करते है !महा शिवरात्रि के मौके हर तरफ़ आज सुबह से ही श्रदालुओं में भोले का रंग चढा नजर आ रहा था ! महिलाएं, बच्चे, बूढे और जवान हर कोई अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे ! इस मौके पुलिस ने भी बंदोबस्त भी पुख्ता किए गए थे| सुबह से लम्बी लाइनों में लगी महिलाओं और पुरुषों का कहना है कि इस प्रसिद्ध हाथी खाना मंदिर में उनकी गहरी आस्था है ! यहाँ भगतजन जो भी मन्नत मांगते हैं उनकी मन्नत पूरी होती है !

प्राचीन हाथीखाना मंदिर 1844 में बना था और देश के गुलामी के समय शेरशाह सूरी मार्ग के पास घने जंगल में यह मंदिर बना था ! ब्रिटिश शासक में शासक यहाँ अपने हाथी यहाँ बांधा करते थे तभी इसका नाम मंदिर हाथीखाना पड़ा था ! लोगों की इतनी श्रद्धा है कि उनका कहना है यहाँ सुबह से लम्बी लाइने लगती जो शाम तक भोले को जलभिषेक करते हैं ! यहाँ आने वाले हर व्यक्ति की इच्छा और मनोकामना पूरी होती है !

सेवक चन्दर प्रकाश की माने तो हर साल भक्त यहाँ 55 किवंटल खीर और 40 किवंटल दूध का प्रशाद श्रद्धालुओं में बांटते हैं जो सुबह से शाम तक खीर का भंडारा चलता है ! इसी के साथ 30 किवंटल काजू और बादाम वाला दूध का प्रशाद सेवक सुरिंदर शर्मा पिछले 25 साल से यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं  हैंलोगों में भगवान शिव के प्रति कितनी आस्था है !शिवरात्रि के मौके पर सुबह से ही मंदिरों में भगतों की लंबी लाईने लगनी शुरु हो गई थी ! सुबह 4 बजे से ही महिलाओं और पुरुषों/ बच्चों की दो अलग अलग लम्बी लाइने लगनी शुरू हो गई थी ! बरसो से इस मंदिर की सेवा कर रहे महंत 108 श्री मोहन दास का यह कहना है कि यह प्राचीन मंदिर 1844 में निर्मित किया गया था और यह शिवजी का सबसे ज्यादा पुराना मंदिर है ! इस मंदिर की श्रद्धा अपने आप में अटूट है, सभी की मनोकामना यहाँ शिव भोले पूरी करते हैं ! विशेषकर आज महा शिवरात्रि पर्व के दिन भोले नाथ अपने भगतों को जरुर दर्शन देते हैं और लोग अपनी मन्नत पूरी करने को !