नरेला : जाट धर्मशाला में महाराजा सूरजमल की याद में मनाया गया बलिदान दिवस ...........

जमाने की भागदौड़ औरबदलते जीवन के रंगरूप में हम अपने अतीत के बलिदानी महापुरुषों को भूलते जा रहें हैं। नए बच्चे , नयी पीढ़ी इस दौर में अपने पूर्वजों के अदम्य साहार पराक्रम और बलिदान को ना भूले इसलिए समय समय पर ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन संस्कार और संस्कृति के बीज निरंतर पिरोये जाते रहने चाहिए। लोगों ने महाराजा सूरजमल को याद करते हुए उनके जीवन की बहुमूल्य बातो को भी साझा किया।

नरेला  : जाट धर्मशाला में महाराजा सूरजमल की याद में मनाया गया बलिदान दिवस ...........

 बाहरी दिल्ली के नरेला जाट धर्मशाला में आज महाराजा सूरज मल के अदम्य साहस को याद करतें हुए बलिदान दिवस का आयोजन किया गया। इस मौके पर समाज और आस पास के 25 गाँवों के वरिष्ठ लोग युवा और बच्चे मौजूद रहें।  लोगों ने महाराजा सूरजमल के प्रतीक चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें याद किया और नए पीढ़ी को उनसे प्रेरणा लेनी की सीख दी।  महापुरुषों और अपने गौरवशाली अतीत को नए जमाने की पीढ़ी कहीं भूल ना जाए इसलिए आज बाहरी दिल्ली के नरेला जाट धर्मशाला में महराजा सूरजमल के अदम्य साहस को याद करते हुए बलिदान दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया गया।  इस मौके पर आस  25 गाँवों के वरिष्ठ  और युवा साथी समेत राजनैतिक हस्तियां भी मौजूद रही।  लोगों ने फूल पुष्प अर्पित कर हिंदुत्व के गरिमामयी प्रेरणास्रोत को याद किया और उन्हें दिलों में जीवित रखने की प्रेरणा ली।जमाने की भागदौड़ औरबदलते जीवन के रंगरूप में हम अपने अतीत के बलिदानी महापुरुषों को भूलते जा रहें हैं।  नए बच्चे , नयी पीढ़ी इस दौर में अपने पूर्वजों के अदम्य साहार पराक्रम और बलिदान को ना भूले इसलिए समय समय पर ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन  संस्कार और संस्कृति के बीज निरंतर पिरोये जाते रहने चाहिए। लोगों ने महाराजा सूरजमल को याद करते हुए उनके जीवन की बहुमूल्य बातो को भी साझा किया।