हैदराबाद काण्ड के बाद पूरा देश चैन की नींद नहीं सो पाया हैं , देश के कोने कोने में जागरूकता फैली हैं और लोग इस जघन्य अपराध के खिलाफ एकजुट होकर निकल नकार बाहर आये ...........

बलात्कार इंसानियत के माथे पर कलंक के टीके जैसा हैं जो हर दफा ये साबित करता हैं की इंसानियत और हैवानियत में अभी एक स्पष्ट रेखा नहीं खींची जा स्की हैं. बेटियों के प्रति बद्द्तर जिंदगी और सोच में इस अपराध की अग्रिम भूमिका है। ऐसे में ऐसे नाटकों का आयोजन कहीं न कहीं छात्रों और संस्थाओं द्वारा ऐसे नाटक किताबी नैतिक शिक्षा को मानवीय धरातल पर उतारने में सफल होते रहें हैं। थोड़ा ही सही पर परिवर्तन के लिए लिया गया ये पहल सराहनीय हैं।

हैदराबाद काण्ड के बाद पूरा देश चैन की नींद नहीं  सो पाया हैं , देश के कोने कोने में जागरूकता फैली हैं और लोग इस जघन्य अपराध के खिलाफ एकजुट होकर निकल नकार बाहर आये ...........

 हैदराबाद काण्ड के बाद पूरा देश चैन की नींद नहीं  सो पाया हैं , देश के कोने कोने में जागरूकता फैली हैं और लोग इस जघन्य अपराध के खिलाफ एकजुट होकर निकल नकार बाहर आये हैं।  इसी क्रम में आज जान शक्ति पार्टी द्वारा राजीव चौक गेट नंबर 6  पर नुक्कड़ नाटक के जरिये लोगों को लोगों को जागरूक किया।  नाटक का उद्देश्य लोगों को जागरूक करना और साथ ही आम जान मानस में इस अपराध के सचेत करना था।  हैदराबाद एनकाउंटर के बाद नाटक के कलाकारों ने हैदराबाद पुलिस की भी सराहना की। हालांकि हैदराबाद रेप कांड की सजा मुजरिमों को मिल गई।  भागने की कोशिश में पुलिस ने उन चारो आरोपियों का एनकाउंटर कर डाला।  चारो मारे गए।  लेकिन इस घटना ने लोगों की चेतना जागृत कर दी हैं।  स्कूल कॉलेज और विभिन्न संस्थाओं के साथ साथ कई पार्टियों ने भी लोगों में जागरूकता फैलाना का बीड़ा उठाया हैं।  सतकर्ता के साथ साथ ऐसे समय में मनचलों से निपटने, खुद को सुरक्षित रखने और घटना के बाद क्या किया जाना चाहिए उसके लिए लोगों को समझाया जा रहा हैं।  इसी क्रम में आज दिल्ली के जनशक्ति पार्टी द्वारा एक सीपी या कनॉट प्लेस राजीव चौक मेट्रो स्टेशन गेट नंबर 6 के पास नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया जहाँ इस नुक्कड़ नाटक के माध्यम से लोगो को ऐसी शर्मसार कर देने वाली घटना के खिलाफ जागरूक किया गया।   बलात्कार इंसानियत के माथे पर कलंक के टीके जैसा है जो हर दफा ये साबित करता हैं की इंसानियत और हैवानियत में अभी एक स्पष्ट रेखा नहीं खींची जा स्की हैं. बेटियों के प्रति बद्द्तर जिंदगी और सोच में इस अपराध की अग्रिम भूमिका है।  ऐसे में ऐसे नाटकों का आयोजन कहीं न कहीं छात्रों और संस्थाओं द्वारा ऐसे नाटक किताबी नैतिक शिक्षा को मानवीय धरातल पर उतारने में सफल होते रहें हैं।  थोड़ा ही सही पर परिवर्तन के लिए लिया गया ये पहल सराहनीय हैं।