हरियाणा की इस खिलाड़ी ने ओलंपिक के लिए किया क्वालीफाई

जींद जिला के खेल गांव निडानी की महिला कुश्ती खिलाडी अंशु मलिक जापान के टोकिया में होने वाले ओलंपिक खेलों में खिलाडिय़ों को पछाड़ती नजर आएगी। इस खिलाड़ी ने 57 किलोभार में ओलंपिक खेलों के लिए क्वालीफाई कर लिया है।

हरियाणा की इस खिलाड़ी ने ओलंपिक के लिए किया क्वालीफाई

Jind (Parmjeet Pawar) || जींद जिला के  खेल गांव निडानी की महिला कुश्ती खिलाडी अंशु मलिक जापान के टोकिया में होने वाले ओलंपिक खेलों में खिलाडिय़ों को पछाड़ती नजर आएगी। इस खिलाड़ी ने 57 किलोभार में ओलंपिक खेलों के लिए क्वालीफाई कर लिया है। अंशु मलिक के गांव में खुशी का माहौल है और हर किसी को विश्वास है कि अंशु खेलों में गोल्ड मेडल जीतकर ही वतन वापसी करेगी। अंशु के घर बधाई देने वाले लोगों का तांता लगा हुआ है। सोमवार को ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में लोग अंशु के घर पंहुचे और परिजनों को मिठाई खिलाकर बधाईयां दी।

बी ए अन्तिम वर्ष की छात्रा अंशु मलिक ने कुश्ती का अभ्यास गांव के खेल स्कूल से शुरू किया था। उन्होंने जिला,राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन करते हुए ओलंपिक खेलों का टिकट हासिल कर लिया है। उन्होंने दूरभाष पर बताया कि ओलंपिक खेलों में स्वर्ण पदक जितने के लिए मन लगाकर कड़ी मेहनत कर रही हूै। देशवासियों की आशाओं व आंक्षाओं को पूरा करने के लिए कोई कसर नही छोड़ी जाएगी और हर हाल में स्वर्ण पदक जीतकर ही स्वदेश वापसी कंरूगी। उन्होंने इस मुकाम तक पंहुचाने के लिए अपने दादा-दादी, माता-पिता, खेल प्रशिक्षक का भी आभार प्रकट किया और कहा कि इन्ही की बदौलत इस मुकाम तक पंहुच पाई हैु।

दादी ने किया कुश्ती खिलाड़ी बनने के लिए प्रेरित: अंशु मलिक ने बताया कि बचपन मेंं दादा-दादी के साथ सुबह सैर करने के लिए जाती थी, इस दौरान एक दिन दादी ने कहा कि लड़कियां लडक़ों से कम नही हैं,वे कुश्ती जैसे खेल में भी आगे बढ सकती हैं। उन्होंने कई महिला खिलाडिय़ों के उदाहरण भी दिये। इसी बात से प्रेरित होकर कुश्ती खेलना शुरू किया। अंशु मलिक की पारिवारिक पृष्ट भूमि लम्बे समय से खेलों से जुड़ी हुई है। उनके दादा मास्टर बीर सिंह अच्छे एथेलेटिक्स रहे है। पिता जी धर्मबीर मलिक राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर के कुश्ती खिलाड़ी रहे है। अंशु के ताऊ पवन मलिक भी भारत कुमार रहे है। अंशु मलिक की माता उच्च शिक्षित महिला है और अंशु मलिक यह भी बताती हैं कि माता मंजु देवी ने उनके खान-पान का बहुत ध्यान रखा है और आगे बढने के लिए प्रेरित भी करती रही हैं।

कुश्ती खेल कर ही मिलता है संतोष: अंशु मलिक ने बताया कि बहुत सारे खेल खेले जाते है,लेकिन उनका मन हमेशा कुश्ती में ही लगता था और कुश्ती खेलकर ही मन को संतुष्टी मिलती थी। अब कुश्ती के माध्यम से देश का गौरव बढाने का समय आया है,निश्चित रूप से देश के  भरोसे पर खरा उतरने का काम करूंगी। अंशु मलिक के पिता धर्मबीर मलिक ने बताया कि अंशु का छोटा भाई शुभम भी उनकी बहन की तरह ही कुश्ती खिलाडी बनना चाहता है,लडक़ा-लडक़ी में कोई भेद न मानकर दोनों को आगे बढने के  लिए बराबर सुविधाएं दी जा रही हैं।